उत्तराखंड के इस हाईवे पर सफर करना बिल्कुल भी आसान नहीं है। जी हां चौकिए मत, पिछले 17 दिनों में इस हाईवे पर सफर के दौरान 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। चिंता की बात है कि इस हाइवे पर सफर करते हुए संचार सुविधा भी बेहतर नहीं है।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में धारचूला-लिपूलेख हाईवे पर सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। चीन सीमा को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे लोगों को मौत की नींद सुला रहा है। महज 17 दिन के भीतर ही सड़क की बदहाली 11 लोगों की जान ले चुकी है।
तवाघाट से गुंजी तक जगह-जगह पहाड़ियां मौत बनकर झांक रही हैं। मंगलवार को धारचूला-लिपूलेख एनएच में एक बार फिर सड़क दुर्घटना ने चार लोगों की जिंदगी लील ली। बताया जा रहा है कि चारों आदि कैलाश दर्शन कर वापस लौट रहे थे।
बीते आठ अक्तूबर को भी इस मार्ग में दर्दनाक हादसा हुआ। हालांकि इस दौरान बूंदी से धारचूला आ रहे एक वाहन के ऊपर पहाड़ी का एक पूरा हिस्सा टूटकर गिर गया था।
50 से अधिक लोगों की हो चुकी है मौत
पिथौरागढ़। धारचूला-लिपूलेख सड़क कटिंग का कार्य दो दशकों से चल रहा है। बीआरओ ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद चीन सीमा तक सड़क पहुंचा दी है, लेकिन पहाड़ों की बेतरतीब कटान से यह सड़क खतरों से भरी पड़ी है। मार्ग भर में 20 से अधिक डेंजर जोन हैं।
वर्ष 2017 से इस मार्ग में लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अब तक 50 से अधिक लोग इस सड़क के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं।
पिथौरागढ़ में चीन सीमा से लगे क्षेत्रों में संचार सेवा की बदहाली दुर्घटना होने पर जी का जंजाल साबित हो रही है। यहां तक स्थानीय लोगों के लिए दुर्घटना की सूचना प्रशासन को देना तक मुश्किल हो रह है। मंगलवार को हुए हादसे में भी यही देखने को मिला। घटना दोपहर के करीब हुई, लेकिन प्रशासन को घंटों बाद जानकारी मिली। इससे रेस्क्यू कार्य देरी से शुरू हुआ।
