केदारनाथ आपदा से प्रभावित तीर्थ पुरोहितों को भूमिधर अधिकार के तहत भवन देने समेत कई कई मांगों को लेकर केदारनाथ धाम में दुकानें, होटल और लॉज तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों के आंदोलन के चलते पूर्ण रूप से बंद रहे।
इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर एक दिवसीय धरना भी दिया, जिससे धाम पहुंचने वाले यात्रियों को खाने, पीने एवं रहने की की खासी दिक्कतें उठानी पड़ी। शीघ्र मांगों पर उचित कार्यवाही न होने पर आमरण अनशन शुरू करने की चेतवानी भी दी।
तयशुदा कार्यक्रम के तहत शनिवार को केदारनाथ धाम में तीर्थ पुरोहित एवं स्थानीय लोगों ने सुबह सात बजे अपने प्रतिष्ठान को बंद कर दिए थे। जिसके बाद समस्त तीर्थ पुरोहित एवं स्थानीय लोग मंदिर प्रांगण में एकत्रित हुए, और भूमिधर अधिकार एवं खड़े भवनों को छेड़छाड़ न करने को लेकर केदारनाथ मंदिर से चबूतरे तक जोरदार प्रदर्शन कर नारेबाजी की। इसके बाद मंदिर के पास एक दिवसीय धरना भी दिया।
तीर्थ यात्रियों को खाने-पीने को लेकर खासी दिक्कत
केदारनाथ धाम में 24 घंटे के बंद के चलते सभी दुकानें, होटल और लॉजों के बंद के चलते तीर्थ यात्रियों को खाने-पीने से लेकर रहने को लेकर खासी दिक्कतें उठानी पड़ी। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज अपनी मांगों को लेकर आंदोलित हैं।
2013 की आपदा में बहे भवन के स्थान पर बने भवन को सौंपे जाने की मांग
वर्ष 2013 की आपदा में केदारनाथ धाम में जो भवन बहे थे और उनके स्थान पर निर्माण हुए भवनों को उन्हें सौंपा जाए। तीर्थ पुरोहितों को केदारनाथ में भूमि का अधिकार मिले। आपदा से पहले उन्हें भूमि का अधिकार था, लेकिन आपदा के बाद से अभी तक उन्हें भूमि का अधिकार नहीं मिल पाया है।
निर्माण कार्यों को लेकर सरकार को स्थिति करनी चाहिए साफ
कहा कि केदारनाथ धाम में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर सरकार को अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए। धाम के तीर्थ पुरोहित और स्थानीय लोग सरकार की स्पष्ट नीतियां न होने के कारण असमंजस की स्थिति में हैं। कहा कि प्रथम चरण में केदारनाथ से लेकर केदारनाथ घोड़ा पड़ाव तक के बाजार बंद किए गए। अगर फिर भी मांगों पर उचित कार्यवाही नहीं होती है, तो पैदल मार्ग पर समस्त प्रतिष्ठानों को बंद कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
अगर रविवार तक उनकी मांगों पर उचित कार्यवाही नहीं होती है, तो 18 सितंबर से तीर्थ पुरोहित धाम में उग्र आंदोलन के साथ आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे।
धरना प्रदर्शन के दौरान मौजूद
धरना प्रदर्शन करने वालों में केदार सभा के अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, मंत्री अंकित सेमवाल, संतोष त्रिवेदी, पंकज शुक्ला, संदीप सेमवाल, विजेन्द्र शर्मा, उमेश चन्द्र पोस्ती, देवेश बाजपेई, अनिल बगवाडी, चिमनलाल शुक्ला, प्रदीप शुक्ला, अरविंद शुक्ला, अनुराग शुक्ला, आशीष शुक्ला समेत बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित एवं स्थानीय लोग उपस्थित थे।
यह है तीर्थ पुरोहितों की मांगें
- वर्ष 2013 की आपदा में पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त भवनों के भवन स्वामियों को भू स्वामित्व के साथ भवन दिए जाएं
- मंदिर चबूतरे के विस्तार के लिए जिन भवन स्वामियों की जमीन अधिग्रहण की गई उन्हें प्राथमिकता के आधार पर भूमि स्वामित्व के साथ भवन मिले
- जिन तीर्थ पुरोहितों के साथ अनुबंध कर भवन अधिग्रहण किए गए हो, उनके भवनों को जल्द तैयार कर भूस्वामित्व के तहत दिए जाएं
- केदारनाथ मंदिर गर्भगृह में लगाए गए साने की परत की उच्च स्तरीय जांच शीघ्र कराई जाए।
