उत्तराखंड में शहर से लेकर गांव तक बंदरों का आतंक बना हुआ है, जिससे किसान सबसे अधिक परेशान हैं। वह भगाने पर लोगों को काटने आ रहे हैं। बंदरों के आतंक के चलते छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी भयभीत हैं।
ग्रामीणों ने वन विभाग से बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर विधानसभा उपचुनाव के बाद आंदोलन की चेतावनी दी है। नगर, खरेही और कत्यूर घाटी के ज्यादातर गांवों में बंदरों का आतंक बना हुआ है।
बंदरों ने काश्तकारों व व्यापारियों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। बंदरों का उत्पात आए दिन बढ़ता ही जा रहा है। एक ओर जहां खेती चौपट हो रही है, वहीं छोटे बच्चों की सुरक्षा का भी संकट पैदा हो गया है। बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि काश्तकारों का खेती से मोहभंग होता जा रहा है। खेतों को नुकसान करने के साथ-साथ बंदर महिलाओं एवं बच्चों पर भी हमले कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि साग-सब्जी और खेती सब चौपट कर दी है। बंदरों का झुंड घरों के अंदर घुसकर सामान ले जा रहा है।
बंदरों को पकड़ने के लिए चलाया जाएगा अभियान
ग्राम प्रधान संगठन के ब्लाक अध्यक्ष रविशंकर बिष्ट, क्षेपंस भोला दत्त तिवारी, शंकर दत्त जोशी, ग्राम प्रधान उमा भट्ट, व्यापार संघ अध्यक्ष लक्ष्मी दत्त पांडे, प्रदीप भाकुनी, किशोर खोलिया, हरीश जोशी, मनोज पांडे, प्रकाश जोशी, हेम पांडे, कृष्ण चंद्र, काश्तकार भूपाल सिंह, लाल सिंह आदि ने वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाए जाने की मांग की है। इधर, प्रभागीय वनाधिकारी यूसी तिवारी ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
