कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध नैनीताल जिले के नौ महाविद्यालयों में भगवा परचम लहराया है। यहां विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर विश्वास जताते हुए कालेज की सरकार की कमान सौंपी है, जबकि कांग्रेस के अनुषांगिक संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) रामनगर कालेज जीतने में सफल रहा।
नैनीताल जिले में 12 महाविद्यालय हैं। इनमें से 10 कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव हुआ। एबीवीपी ने कमाऊं के सबसे बड़े एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी, डीएसबी परिसर नैनीताल सहित सभी महाविद्यालयों में प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। जबकि, एनएसयूआई ने सिर्फ चार कॉलेज में चुनाव लड़वाया।
एमबीपीजी में कांग्रेस ने स्वयं के छात्र संगठन से प्रत्याशी न उतारकर निर्दलीय को समर्थन दिया था। विद्यार्थी परिषद की ओर से महिला और गौलापार कॉलेज के सभी पदों पर लड़ाए गए पैनल ने जीत दर्ज की। वहीं पहाड़ के तीन कॉलेजों में एबीवीपी के प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए। जबकि, मंडल में छात्र राजनीति के केंद्र एमबीपीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद पर कड़ी टक्कर के बीच एबीवीपी प्रत्याशी सूरज रमोला ने जीत दर्ज की। विवि प्रत्याशी पद पर गौरव कांडपाल भी विजयी रहे। नैनीताल और हल्दूचौड़ कॉलेज में परिषद का परचम लहराया।
हुड़दंग और अराजकता रही चरम पर
छात्रसंघ चुनाव के समर में हुड़दंग और अराजकता चरम पर रही। विद्यार्थियों को लुभाने के लिए प्रत्याशियों ने जमकर पसीना बहाया, लेकिन अपना नेता चुनने को लेकर छात्र-छात्राओं ने खास उत्साह नहीं दिखाया। नैनीताल जिले के छह महाविद्यालयों में मंगलवार को हुए मतदान में मतदाताओं की बेरुखी साफ तौर पर देखने को मिली।
इतने प्रतिशत हुआ मतदान
कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय और छात्र राजनीति के केंद्र एमबीपीजी कालेज में 37.27 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां छात्र नेताओं, संगठनों ने पूरी ताकत झोंकी, मगर पिछले वर्ष की अपेक्षा मतदान में 3.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दोपहर डेढ़ बजे के बीच ही दोनों गेटों पर मतदाताओं की भीड़ खत्म हो गई थी।
वहीं, डीएसबी परिसर नैनीताल में 55.54 प्रतिशत विद्यार्थियों ने मतदान किया। यहां पिछले वर्ष की तुलना में मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन विवि का एकमात्र परिसर होने के बावजूद अपेक्षा से कम छात्र वोट डालने पहुंचे। इधर, सर्वाधिक मतदान एलबीएस महाविद्यालय हल्दूचौड़ में हुआ। यहां 74.86 प्रतिशत वोट पड़े। गौलापार कालेज में पहली बार हुए चुनाव में 52.96 प्रतिशत मतदान हुआ।
पुराने बागियों का साथ मिला
एमबीपीजी कॉलेज में इस वर्ष हुए छात्रसंघ चुनाव ने एबीवीपी के पुराने कार्यकर्ताओं को वापस संगठन से जोड़ा। टिकट नहीं मिलने पर बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष संजय रावत, नीरज मेहरा सूरज के साथ खड़े रहे। एबीवीपी छोड़ने के बाद 2019 में निर्दलीय अध्यक्ष बने राहुल धामी भी विद्यार्थी परिषद के साथ लगे रहे।
एनएसयूआई से अध्यक्ष रहे देवेंद्र नेगी और रविंद्र रावत भी परिषद के संग रहे। भाजपा, युवा मोर्चा संग एबीवीपी के पूर्व कार्यकर्ता संयुक्त रूप से प्रचार करते दिखे। यह सूरज की जीत में अहम रहा।
