भारत से जा रहे हाथियों ने नेपाल में लोगों की नींद उड़ा दी है। उत्तराखंड के चम्पावत के टनकपुर-बनबसा से लगते नेपाल के दोधारा चांदनी नगर पालिका क्षेत्र के लोग इससे सबसे ज्यादा परेशान हैं। भारतीय सीमा से निकलकर नेपाल पहुंच रहे हाथी आए दिन उनकी खेतीबाड़ी चौपट कर रहे हैं। हाथियों के उत्पात से निजात के लिए दोधारा के लोगों ने अब भगवान गणेश की शरण ली है।
लोगों ने हाथियों से मुक्ति के लिए मंगलवार को सामूहिक पूजा भी की। भारत और नेपाल के बीच हाथी सदियों से आवागमन कर रहे हैं। बीते कुछ सालों में इनके रास्तों में हुए अतिक्रमण और तेजी से हो रहे सड़क निर्माण ने बाधाएं उत्पन्न की हैं। इससे नाराज हाथी कई बार दोनों देशों के लिए मुसीबत खड़ी कर दे रहे हैं। इस बार हाथियों ने नेपाल के लोगों की नाक में दम किया है।
दोधारा चांदनी के वार्ड अध्यक्ष केशव खत्री कहते हैं, टनकपुर-बनबसा सीमा से नेपाल में प्रवेश करने वाले हाथी पहले केवल खेती को नुकसान पहुंचाते थे तो लोग बर्दाश्त कर लेते थे। लेकिन पिछले कुछ समय से हाथी आवासीय बस्तियों में प्रवेश करने लगे हैं। इससे जानमाल का खतरा बढ़ गया है।खत्री बताते हैं, नेपाल में सभी जगह गुहार लगाने के अलावा भारत में स्थानीय प्रशासन से मदद मांगी गई, लेकिन कहीं कोई असर नहीं हुआ। अब लोग भगवान की शरण में गए हैं। कहा कि लोग हाथियों की आवाजाही से काफी परेशान हैं।
भुट्टे की खेती करती है हाथियों को आकर्षित नेपाली नागरिक धनसरा चंद ने बताया कि बीते माह भुट्टे की खेती ने हाथियों को नेपाल की ओर काफी आकर्षित किया। हाथियों की पसंद को देखते हुए कई लोगों ने भुट्टे उगाना भी कम कर दिया है। इससे रोजी-रोटी भी प्रभावित हो रही है।
रात को बर्तन बजाकर फसल की सुरक्षा कंचनपुर उद्योग वाणिज्य संघ के पूर्व उपाध्यक्ष माधव प्रसाद जोशी ने बताया कि हाथियों के कारण नेपाल के गांवों में खेती करना मुश्किल हो गया है। सीमा क्षेत्र में रहने वाले नेपाली नागरिक रात को पहरा देते हुए बर्तन बजाकर हाथियों को भगा रहे हैं। ताकि खेती की सुरक्षा हो सके। कई बार यहां पर हाथी को भगाने के लिए पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है।
भारतीय सीमा से लगे नेपाल के दोधारा चांदनी नगरपालिका क्षेत्र के लोगों ने भारत से आने वाले हाथियों के आतंक से निजात पाने के लिए गणपति की पूजा की है। जो एक अनूठी आराधना है। हाथी इन नागरिकों की खेतीबाड़ी, बस्तियों पर आए दिन हमले कर नुकसान कर रहे हैं।
