देहरादून, ब्यूरो। संस्कृत भाषा के महत्व एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता को लेकर श्री सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है और संस्कृत से ही अन्य भाषाओं की उत्पत्ति भी हुई है लेकिन इसके प्रचार प्रसार को लेकर जागरूकता ना होने के कारण आज संस्कृत भाषा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है इसको बचाने व इसका प्रचार प्रसार करने के लिए सभी को आगे आना होगा।
इस मौके पर संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि आज हम अपने जीवन में अपने धर्म को भूल गए हैं आज घरों में जन्मदिन के अवसर पर केक काटने और मोमबत्ती बुझाने का प्रचलन चल रहा है लेकिन इसी के स्थान पर हम अपने संस्कारों को देखते हुए जन्मदिन पर पूजन करें और दीपक जलाकर प्रभु का वंदन करें तो कहीं ना कहीं यह हमारे भविष्य के लिए उचित होगा क्योंकि इनमें नवग्रहों का पूजन किया जाता है।
?वही संस्कृत शिक्षा उपनिदेशक वात्सव आर्य ने बताया कि संस्कृत न सिर्फ ब्राह्मणों की भाषा है बल्कि संस्कृत विश्व की सबसे पुरातन भाषा है जिसको आज हम भूलते जा रहे हैं और संस्कृत के माध्यम से आप शिक्षक ,डॉक्टर व आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि पूर्व में जितने भी महान ऋषि मुनि हुए वह संस्कृत भाषा के ज्ञान पर ही हुए और संस्कृत विद्यालयों का विकास धीरे-धीरे बहुत तीव्र गति से हो रहा है शिक्षा के साथ-साथ यहां योग कंप्यूटर और भी कई प्रकार की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को फिर से विश्व गुरु बनना है तो संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार करके एक बार फिर संस्कृत भाषा को अपने जीवन में लाना होगा तभी हम विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर होंगे।