ऊर्जा निगम इस साल से हर छोटे-बड़े बिजली उपभोक्ता से अतिरिक्त जमानत राशि वसूलने को ऑनलाइन नोटिस भेज रहा है। इस अतिरिक्त शुल्क को लेकर बिजली उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। दिक्कत ये है कि बिजली बिलों में इस अतिरिक्त जमानत राशि का कहीं कोई जिक्र नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में सिर्फ ऑनलाइन ही जानकारी दी जा रही है।
बिजली कनेक्शन लेते समय उपभोक्ताओं से जमानत राशि जमा कराई जाती है। यदि बिजली का प्रतिमाह बिल, तय जमानत राशि से अधिक आता है, तो यह अतिरिक्त पैसा एक्सट्रा डिपॉजिट के रूप में जमा कराया जा रहा है। मसलन यदि जमानत राशि 500 रुपये जमा है और बिल 700 रुपये प्रतिमाह आ रहा है, तो 200 रुपये अतिरिक्त जमानत जमा करानी होगी।
बिल 300 रुपये आने पर 200 रुपये पर ब्याज मिलेगा। अभी तक इस चार्ज की वसूली सिर्फ बड़े बिजली उपभोक्ताओं, उद्योगों से ही होती थी। अब छोटे उपभोक्ताओं से भी वसूली हो रही है। उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बिजली बिल में अतिरिक्त जमानत राशि का जिक्र नहीं किया जा रहा है। सिर्फ ऑनलाइन ही ब्योरा दिया जा रहा है।ऐसे में उनके पास कोई लिखित साक्ष्य, दस्तावेज नहीं है, जिसमें इस अतिरिक्त चार्ज की जानकारी मिल सके। कई उपभोक्ता इस अतिरिक्त जमानत राशि का गणित ही नहीं समझ पा रहे हैं। उन्हें ये पता ही नहीं चल रहा कि ऊर्जा निगम आखिर किस बात का चार्ज वसूल रहा है। यूपीसीएल के इंजीनियर भी स्थिति स्पष्ट करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
अधिवक्ता आलोक घिल्डियाल ने कहा कि यूपीसीएल को बाकायदा बिल में इसका उल्लेख करना चाहिए। ऑनलाइन जानकारी देने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि आज भी तमाम लोग ऑनलाइन सिस्टम से अनजान हैं। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को समझ ही नहीं आ रहा है कि ये अतिरिक्त चार्ज क्या है।
एडिशनल जमानत राशि जो भी ली जाएगी, वो उपभोक्ताओं की जमा जमानत राशि में ही जुड़ेगी। इससे उपभोक्ताओं की जमानत राशि जमा हो जाएगी। जिससे अगले साल इसी जमानत राशि पर उपभोक्ताओं को ब्याज का भी लाभ मिलेगा। इस अतिरिक्त चार्ज का ब्योरा बिजली बिलों में भी सुनिश्चित कराया जाएगा।
