कुत्ते को भले ही वफादार जानवर माना जाता है, लेकिन अगर यह वफादारी भूल जाए तो जान के लिए खतरा हो सकता है। अगर कुत्ता किसी को काट ले और समय रहते उपचार न मिले तो रैबीज से इंसान की मृत्यु तक हो सकती है। शहर में सबसे ज्यादा मुसीबत का सबब बने हुए हैं स्ट्रीट-डॉग यानी आवारा कुत्ते।बात दून शहर की करें तो ऐसा कोई भी गली और मोहल्ला नहीं जहां आवारा कुत्तों का आतंक न हो। शाम ढलने के बाद शहर के गली-मोहल्लों में पैदल या दुपहिया पर निकलना खतरे से खाली नहीं। शाम से रात का समय तो खतरनाक है ही दोपहर में भी कुत्ते बच्चों को निशाना बनाने से नहीं चूक रहे। शिकायतों के बावजूद नगर निगम इन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
आवारा कुत्तों के आतंक से जनता परेशान
न तो कुत्तों की नसबंदी हो रही, न ही इन्हें कहीं छोड़ा जा रहा। सहस्रधारा रोड स्थित पैसिफिक गोल्फ एस्टेट अकेला क्षेत्र नहीं, जहां आवारा कुत्तों के आतंक से जनता परेशान हो, कमोबेश यह स्थिति पूरे शहर की है। शहर के अस्पतालों में रोजाना कुत्तों के काटने के औसतन 20 से 30 मामले सामने आ रहे हैं। अकेले दून अस्पताल में ही औसतन 15 मामले रोजाना आते हैं। हर तीन माह में एंटी रैबीज वैक्सीन की तीन हजार डोज मंगाई जाती है।
आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने में नगर निगम फेल
वहीं, आवारा कुत्तों पर लगाम लगाने के लिए नगर निगम फेल साबित हो रहा है। स्थिति ये है कि शहर में तमाम कॉलोनियों में शाम ढलते ही आवारा कुत्ते आतंक मचाते हैं। इस कारण लोग घर से बाहर जाने में डरने लगे हैं। नगर निगम के पास कुत्तों की नसबंदी को लेकर एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर जरूर है, लेकिन यह विफल साबित हो रहा। शहरवासी आए दिन निगम में शिकायत लेकर पहुंचते हैं और मायूस होकर लौट जाते हैं।
शहर में करीब 50 हजार कुत्ते
नगर निगम के अनुसार शहर में करीब 50 हजार आवारा कुत्ते हैं। प्रभावित इलाकों में कौलागढ़, एमडीडीए कॉलोनी, डालनवाला, अधोईवाला, करनपुर, पलटन बाजार, केवल विहार, नालापानी, रेसकोर्स, वसंत विहार, आर्यनगर, देहराखास, तिलक रोड, खुड़बुड़ा, वसंत विहार व पटेलनगर आदि मुख्यतः शामिल हैं।
की जा रही है कुत्तों की नसबंदी
‘आवारा कुत्तों को लेकर नगर निगम का एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर संचालित हो रहा है। यहां लगातार कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। जिन इलाकों में शिकायतें हैं, वहां टीम भेजकर दिखवाया जाएगा और आवारा कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी कराई जाएगी।’ सुनील उनियाल गामा, महापौर
जानलेवा बीमारी है रैबिज
‘भारत में प्रतिवर्ष करीब 20 हजार लोगों की मौत कुत्तों या अन्य जानवर के काटने पर रैबीज के चलते होती है। रैबीज जानलेवा बीमारी है। इससे बचाव जरूरी है। ऐसे में जानवर के काटने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन मुफ्त दी जाती है। मरीज को चार बार वैक्सीन दी जाती है।’ डा. अनिल आर्य, चर्म रोग विशेषज्ञ
